Mera Vajood (Hindi Poem) (Express Yourself Contest # 24)

May 21 2008  | Views 371 |  Comments  (26)
Tags:

मेरा वजूद

आवारा बादल के एक टुकडे सा मेरा मन 
तलाशता है अपना वजूद 
हिमालय की ऊंची पहाडियो से लेकर 
सागर की अतल गहराईयो तक
खाख छानता है 
मन्दिर मस्जिद और गिरिजाघर की
नही मिलता कहीं कोइ जवाब

जब टूटने लगती है आस 
और लगता है कोइ नही है साथ
तब आवाज आती है कहीं से 
बोल पडता है आईना

देख तो जरा पगली, 
ये पूरा विश्व है तेरा वजूद, 
हर एक छोटी बडी चीज, 
ये पूरी कायनात है तेरे अस्तित्व की साछी, 
अगर कोइ अनजान है तो वो तू है

ये पूरी दुनिया है जिसके दम पर, 
जो शुरुआत है सम्पूर्ण सन्सार की, 
पगली वो तू ही है

जिसके हसंने से आबाद होती है सारी दुनिया, 
जिसके दामन में है सारे जहान की खुशियां, 
हां वो मै ही हूं 
सरल, सजग, समर्पित, द्रण निश्चयी और कर्मठ 
हां ये मै ही हूं... 
मै स्त्री हूं

© Poonam Mishra., all rights reserved.

Recommend

5
votes
votesEnjoyed this post? Cast your vote and recommend to other readers


Leave a comment



Advertisement


Member Since Feb 9 2008
© 1998-2008 Copyright Sulekha.com Connecting Indians Worldwide, All Rights Reserved.